दोस्ती मे उम्र का बंधन नही होता

रोहाणी एक चालीस वर्षीय वकील थी| वह अपने क़ानूनी पेशे से असंतुष्ट थी और कुछ बदलाव की कोशिश मे थी, पर वो इसके लिए हिम्मत नही कर पा रही थी| तभी उसके २५वर्षीय दोस्त ने उसे लेखन मे अपना हाथ आज़माने के लिए कहा| रोहाणी हमेशा से ही लिखने की शोकिन थी| आज रोहाणी ने अपने लेखन के शौक को अपना नया पेशा बना लिया है| वह बेहत खुश और संतुष्ट है|


ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघॅम द्वारा की गई एक रिसर्च में सामने आया की वे लोग ज़्यादा खुश होते है, जिनके पास पुराने दोस्तो की संख्या ज़्यादा होती है|शोधकर्ताओ के अनुसार पुराने ओर करीबी होने का होना व्यक्तिगत खुशी से जुड़ा होता हैं| एक अछा और सच्चा दोस्त वह होता है जो आपकी राहों मे आईं मुश्किलो का हल निकलता हैं साथ ही आपका संबल बढ़ाकर आपको सही रास्ता दिखता हैं| मुश्किल सवाल यह है की अच्छे दोस्त को कैसे ढूँढा या पहचाना जाए|
दोस्ती की कोई उम्र सीमा या मापदंड नही होता| अछा दोस्त पाने के लिए आप अपने मिलने-जुलने वालों मे से उन पर गौर करें, जिनसे आप सहज रूप से बात कर पाते हैं| जिनकी बातों पर आपको हँसी आती हो या आपके परेशान होने पेर उनका मन उदास होता हो| ज़रूरी नही कि आपका दोस्त आपका हमउम्र हो या आपके स्टेटस का हो या आप दोनों का धर्म या भाषा एक हो| दोस्ती कभी भी किसी से भी हो सकती है|

ऑफीस मे आपकी सीट के पास बैठने वाला सहकर्मी भी आपका दोस्त हो सकता हैं| वॉक पर रोजाना मिलने वाले दादाजी या कोई बुजुर्ग, नियमित रूप से आपका चेक-उप करने वाला आपका डॉक्टर या पड़ोस मे रहना वाली बुजुर्ग आंटी कोई भी आपका दोस्त हो सकता हैं| लेकिन इस दोस्ती को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए आपसी प्रेम और विश्वास होना बहुत ज़रूरी हैं| जब ज़िंदगी के रास्ते बंद हो जाते हैं और कोई उम्मीद नही बचती तब अच्छे दोस्त ही जीने का सहारा बनते हैं| अच्छे दोस्त हमें बुरे पलों से उबारते हैं| दोस्ती ख़ुसी को दोगुना करके, दुख को बाँटकर उल्लास बढ़ाती हैं और मुसीबत कम करती हैं| एक सच्चा दोस्त हर परिस्थति में आपका साथ देता है| हमें चाहे रोना हो या हंसना, दोनों ही परिस्थिति में दोस्त ज़रूरी हैं|

समय के साथ बदलते रिश्ते
स्कूल-कॉलेज में पढ़ाई के दौरान व्यक्ति की दोस्ती समान उम्र वालो के साथी ही होती हैं, जो की एक स्वाभाविक प्रक्रिया हैं | लेकिन उम्र और पेशा बदलने के साथ-साथ दोस्ती और प्राथमिकताएं बदलती रहती हैं | क्या आपका कोई दोस्त आप से १०-१५ साल छोटा या बड़ा हैं ? आज जबकि एकल परिवारों का चलन हैं | रिश्ते मोबाइल और सोशल साइट्स पेर सीमटते जा रहे हैं | ऐसे मे भिन्न उम्र की दोस्ती नया आयाम प्रदान करती हैं | रॉबर्ट कूरनाल प्राध्यापक मनोविज्ञान अमरीकी विश्वविद्यालय कहते है कि 'समान आयु होना दोस्ती के असल मायने नही हैं | दो उंरजुदा लोग में भी अर्थपूर्ण दोस्ती हो सकती हैं |

इस दोस्ती के फ़ायदे
  • अनुभव - बड़ी उम्र के दोस्तों से उनके बहुमूल्य अनुभव का लाभ उठा सकते हैं| उनकी संगति मे हमारा दृष्टिकोण भी अधिक व्यापक होता हैं|

  • युवा पीढ़ी से टेक्नालजी - युवा वर्ग नई टेक्नालजी से परिचित करा सकते हैं| यह मेलजोल खुद के बच्चों को समझने मे भी मदद करेगा|

  • पूर्वाग्रहों से मुक्ति - यह संगति आपके कुछ पूर्वाग्रहों से छुटकारा दिला देती हैं और आपकी सोच को व्यापक बनाती हैं|

  • नई उर्जा - समान आयु वालों की एक समान परेशानियां, विचार और उर्जा होती हैं| विपरीत आयु वाले आपको नई उर्जा प्रदान का आपका जीवन नीरस होने से बचाते हैं|
कैसे हो ये दोस्ती
आपको उम्र्जुदा लोग कही भी मिल सकते हैं, जैसे कि क्लब, सोशल ग्रूप्स और ऑफीस जैसे जगह पर | ऐसी जहघ के अलावा यह दोस्त आपके लिए एक बेहतर सिस्टम साबित हो सकते हैं |
साधानियाँ बरतना ज़रूरी
  • हर उम्र का एक अलग दृष्टिकोण होता है, उसे समझने के लिए आपको एक अछा श्रोता होना ज़रूरी है |

  • एक युवा लड़की उम्र्जुदापुरुष से दोस्ती करते वक़्त सावधानी बरते| समझें की सामने वाला का इरादा क्या है |

  • दिन या सप्ताह का कुछ समय अपने दोस्तो को दें, या उसका समय लें |




Published in Dainik Bhaskar  "DB Star-Indore"  on 2016, Apr 05

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